Ramayan

मंदोदरी कौन थी? मंदोदरी से जुडी वो 7 बातें जो आप नहीं जानते !!

who was mandodri

मंदोदरी, रामायण का मुख्या पात्र । रावण की पत्नी मंदोदरी, लंका की महारानी मंदोदरी, मेघनाद की माता मंदोदरी। हममें से अधिकांश लोग इतना ही जानते हैं।आज में आपको बताऊंगा मंदोदरी से जुडी 7 बातें जो शायद आपके लिए बिलकुल नयी होंगी।

पहली बात : हिन्दू उपनिषदों में 5 दिव्य जन्मा कन्याएं बताई गयी हैं जो पांच तत्वों से पैदा हुई थी।अहिल्या हवा से, द्रौपदी आग से, सीता भूमि से, तारा आकाश से और पांचवी है मंदोदरी जो पानी से पैदा हुई थी। अब पानी से इसका क्या सम्बन्ध है और इनका नाम मंदोदरी क्यों है?
तो आपको बता दें की १२ साल तक मेंढकी के रूप में पानी में रेहनी वाला और उसके बाद कन्या रूप में आने वाली, यही थी मंदोदरी।
संस्कृत में मंद-उदर का अर्थ है Soft Belly जो की मेंढक की होती है। ये एक श्राप का परिणाम था।
उत्तर रामायण में इसका उल्लेख मिलता है की मधुरा नाम की अप्सरा कैलाश पर्वत पर महादेव को रिझाने का प्रयास करती है और माता पारवती ये देख कर उस पर क्रोधित हो जाती हैं और उसे मेंढकी होने का श्राप देती हैं। मधुरा बारम्बार शिव-पार्वती की स्तुति करती है तब पार्वती जी श्राप अवधि को 12 साल कर देती हैं। भोलेनाथ भी उसे वरदान देते हैं कि तुम एक ऐसे शिव-भक्त का वरण करोगी जिसके समान प्रतापी ढूंढना सारे विश्व में ढूंढना मुश्किल होगा ।
दूसरी और कश्यप ऋषि के पुत्र मायासुर देवताओं के लिए भव्य महलों का निर्माण करते हैं तो देवराज इंद्र उन्हें हेमा नामक अप्सरा उपहार स्वरूप देते हैं।मायासुर और हेमा के दो पुत्र होते हैं मायावी और दुंदुभि लेकिन वे एक कन्या के लिए तरसते हैं और भोलेनाथ कि तपस्या करते हैं। इसी दौरान उन्हें एक बच्चे कि आवाज़ें आती हैं कुए के पास । वे इसे महादेव कि कृपा मान कर बच्ची को अपना लेते हैं, यही कन्या थी मंदोदरी ।

दूसरी बात: शिव के वरदान स्वरुप मंदोदरी ने अपने होने वाले पति रावण को स्वपन में ही देख लिया था शिव कि आराधना करते हुए और तभी उन्हें तन मन धन से अपना पति स्वीकार कर लिया था।

Chess was started by Mandodariतीसरी बात: मेघनाद , अतिकाय और अक्षय कुमार कि माता मंदोदरी रावण कि अच्छी सलाहकार थी। रावण के मनोरंजन के लिए शतरंज का खेल भी मंदोदरी ने शुरू किया था।

चौथी बात: रावण ने सीता को मारने के लिए चन्द्रहास खडग उठा ली थी किन्तु मंदोदरी ने दशानन का हाथ पकड़ लिया और ये कहकर मना कर दिया कि एक अबला स्त्री कि हत्या आप जैसे शूरवीर को शोभा नहीं देती। ऐसा कृत्य करके आपका अपयश ही फैलेगा।
जब मेघनाद ने राम-रावण को पहचान लिया कि ये नारायण स्वरुप हैं और अवतार हैं तब मंदोदरी ने मेघनाद को राक्षस कुल बचाने और श्री राम कि शरण में जाने का परामर्श दिया था। वो अलग बात है कि मेघनाद ने उसे स्वीकारा नहीं।

पांचवी बात: बाल्मीकि रामायण के अलावा कई और संस्करण भी हैं जैसे कि उत्तर रामायण,आध्यात्म रामायण, थाई रामायण, अद्धभूत रामायण इत्यादि। बाल्मीकि रामायण में मंदोदरी का किरदार काफी छोटा है लेकिन अध्यात्म रामायण कि माने तो जब रावण के सारे पुत्र और वीर योद्धा मर चुके थे तो रावण ने अग्नि समर्पण यज्ञ प्रारम्भ किया।अगर ये यज्ञ पूरा हो जाता तो रावण अजेय हो जाता । श्री राम ने वानरों कि एक टुकड़ी हनुमान और अंगद के नेतृत्व में भेजी इस यज्ञ को विध्वंस करने हेतु। वानरों ने भरसक प्रयास किये पर यज्ञ में बढ़ा उत्पन्न न कर पाए। तब अंगद ने मंदोदरी को बालो से पकड़ा और जमीन पर घसीटा । अंगद ने रावण को बोध करवाया कि ऐसा ही दृश्य तब रहा होगा जब रावण ने सीता माता का हरण किया होगा। रावण क्रुद्ध होकर तलवार निकल लेता है और अंगद पर झपटता है। कृत्तिवासी रामायण और बिचित्र रामायण में वानरों का व्यवहार मंदोदरी के प्रति और भी क्रूर दिखाया है।

hanuman stealing amogh astra from Mandodri's Bedroomछठी बात: बाल्मीकि रामायण बताती है कि रावण कि नाभि में अमृत कुंड था और उसको सूखाने कि अमोघ शक्ति इंद्र ने राम को दी थी। जबकि अन्य संस्करणों में बताया है कि रावण कि मृत्यु एक दिव्य अमोघ अस्त्र से संभव थी जो मंदोदरी अपने शयनकक्ष में रखती थी । इस निर्णायक युद्ध में जब मंदोदरी रावण कि लम्बी आयु के लिए माँ पार्वती का अनुष्ठान कर रही थी तब हनुमान मंदोदरी के शयनकक्ष से उस अस्त्र को चुरा लेते हैं और श्री राम को देते हैं।

सातवीं बात: युद्ध समाप्ति के बाद, राम विभीषण से आग्रह करते हैं कि वे मंदोदरी से विवाह कर लें। हालाँकि विभीषण पहले से विवाहित थे , उनका गंधर्वराज शैलूष कि पुत्री सरमा से विवाह हो चूका था। लेकिन वे श्रीराम कि विनती स्वीकार कर लेते हैं क्यूंकि इससे राक्षसकुल का नाश भी नहीं होगा और राक्षस प्रजा में अराजकता भी नहीं फैलेगी। और श्रीराम ये भी नहीं चाहते थे कि दिव्य जन्मा मंदोदरी अपने पति कि मृत देह के साथ सती हों।
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