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पहले सप्तऋषि : ऋषि वशिष्ठ उनसे जुडी 7 बातें

7 facts about Rishi Vashistha

सप्तऋषियों में से एक है ऋषि वशिष्ठ वे कौन हैं आईये जानते हैं उनके बारे में नमस्कार दोस्तों धर्म संस्कृति चैनल पर आपका स्वागत है हमारे इस ब्लॉग को अंत तक पढ़े और और पसंद आये तो इसे लाइक करें और इस चैनल को अभी तक सब्सक्राइब नहीं किया है तो सब्सक्राइब करें । दोस्तों पिछले ब्लॉग में हमने बात की थी सभी ७ सप्तऋषियों के बारे में आज हम विस्तार से जानेंगे गुरु वशिष्ठ के बारे में । रघुवंश के मुख्यपुरोहित वशिष्ठ जी को राम लक्षमण के गुरु के रूप में जाना जाता है आज हम ये देखेंगे ७ ऐसी बातें जो वशिष्ठ जी से जुडी हुई हैं और शायद आप उन्हें नहीं जानते।

पहली बात -ब्रह्मा जी के औरस पुत्रो में से एक थे वशिष्ठ, एक बार ईछुवाकु वंश के राजा निमि उन्होंने वशिष्ठ जी से एक यज्ञ करने का आग्रह किया वशिष्ठ जी ने कहा अभी इंद्रा के लिए एक यज्ञ कर रहा हूँ इसके बाद आपके यज्ञ का अनुष्ठान करूँगा किन्तु निमि ने कहा में इतनी प्रतीक्षा नहीं कर सकता में किसी और पुजारी का प्रनन्ध कर लेता हूँ, ऋषि वशिष्ठ की इस पर काफी क्रोध आया और उन्होंने निमि को श्राप दे दिया की तुम्हारे शरीर के दो टुकड़े हो जाएँ बदले में यही श्राप निमि ने वशिष्ठ को भी दे दिया वशिष्ठ ऋषि का शरीर मृत हो गया और उनकी केवल आत्मा  रह गयी  उस समय भगवन मित्र और वरुण ने आउट ऑफ़ अट्रैक्शन तो उर्वशी अप्सरा दो पुत्र पाए एक थे वशिष्ठ मुनि और दूसरे थे अगस्त्य मुनि इसीलिए वशिष्ठ ऋषि को मैत्रवरुणि भी कहा जाता है सौजन्य से श्रीमद भगवत ।

दूसरी बात –वशिष्ठ ऋषि का विवाह अरुन्दति से हुआ था जोकि कर्दम ऋषि और देवभूति की पुत्री थी वह मेधातिथि के यज्ञकुंड से पैदा हुई थी इसीलिए उन्हें मेधातिथि कन्या भी कहा जाता है महऋषि वशिष्ठ और अरुन्दति के आठ पुत्र हुए जिनके नाम हैं चित्रकेतु, सुरोची, विरत्रा, मित्र, उलवन, वसु, भृत्यान और द्युतमान ।

तीसरी बात – वशिष्ठ ऋषि और विश्वामित्र ऋषि की प्रतिस्प्रधा सारा संसार जानता है जब विश्वामित्र राजा थे एक बार वशिष्ठ ऋषि के आश्रम में उनका आना हुआ और उन्होंने एक चमत्कारी गाय को देखा जब उन्हें पता चला ये कामधेनी की बछिया नंदिनी है जो जाते समय विश्वामित्र ने वशिष्ठ ऋषि से वह गाय मांग ली ऋषि के इंकार करने पर उनके बीच भीषण युद्ध हुआ और वशिष्ठ ऋषि के ब्रह्मदण्ड के आगे विश्वामित्र की हार  हुई, अपनी हार से कुपित होकर विश्वामित्र ने घोर तपश्या की और एक बार वशिष्ठ ऋषि को दंड देने के लिए छिपकर उनकी कुटिया में पहुंचते हैं और  वशिष्ठ और अरुन्दति का संवाद सुनते हैं वशिष्ठ कह रहे होते इस रात्रि एकाग्रचित मन से प्रभु का ध्यान कर सकता वैसा श्रिस्टी में एक ही है जो है विश्वामित्र अपने प्रति वशिष्ठ ऋषि के उदार वचनो को सुनकर आत्मग्लानि से भर उठते हैं और वशिष्ठ जी के पैरो में पढ़कर माफ़ी मांगते हैं तब ऋषि वशिष्ठ की विस्वामित्र को महऋषि की पदवी देते हैं ।

Sheshnaag, Vashistha & Vishwamitraचौथी बात –एक बार वशिष्ठ और विश्वामित्र में इस बात को लेकर बहस होती है सत्संग बड़ा होता है या तपस्या, त्रिदेवो के पास जाकर भी उन्हें  संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता तो वे शेषनाग के पास आते हैं वशिष्ठ ऋषि कहते हैं की सत्संग बड़ा है और विश्वामित्र कहते हैं की तप बड़ा है ,
शेषनाग कहते हैं में अभी अपने फन पर पृथ्वी की टिकाये हुए हूँ आपमें से जो भी इसे थोड़ी देर उठा ले तो में फैसला कर पाऊं, विश्वामित्र ने अहंकारवश शेषनाग से कहा के पृथ्वी मुझे देदो और आप सोचो लेकिन जैसे ही विश्वामित्र पृथ्वी को लेते हैं पृथ्वी रसातल की ओर जाने लगती है अब वशिष्ठ जी हाथ जोड़कर बोलते हैं की हे माता में अपने समस्त जीवों के  सत्संग में से आधी गाड़ी आपको देता हूँ  ऐसा सुनते ही पृथ्वी रुक जाती हैं ओर काफी देर तक रुकी रहती हैं , फिर शेषनाग उसे दुबारा अपने फन पर धारण कर लेते हैं ओर कहते हैं की आप लोग जाएँ विश्वामित्र ने कहा निर्णय तो सुनाइए, शेषनाग ने कहा अब भी कुछ सुनना बाकि है , आपने अपनी ज़िन्दगी का तमाम तप पृथ्वी को दाल दिया लेकिन वो संभल नहीं पाए ओर वशिष्ठ जी ने आधी गढ़ी ही पृथ्वी को दी ओर वो रुकी रही।

पांचवी बात –  ब्रह्मा जी ने वशिष्ठ ऋषि को दो काम सौंपे थे जिसमे से एक था सृष्टि सञ्चालन जिसमे यज्ञ इत्यादि करना ओर इंद्रा, वरुण, अग्निदेव, इन सब की तपश्या करके इन्हे प्रसन्न करना था ओर दूसरा था इक्षवाकु वंश का पुरोहित बनना वशिष्ठ जी को यह पसंद नहीं आया किन्तु जब ब्रह्मा जी ने कहा की इसी वंश में आगे चलकर भगवन विष्णु नर के रूप में आएंगे ओर आप उन्हें सिखाएंगे, इसी बात पर उन्होंने रघुवंश का कुलपुरोहित बनना स्वीकार किया ।

छठी बात – ऋगवेद के सातवे मंडल के रचयिता गुरु वशिष्ठ ही हैं, वशिष्ठसंहिता ओर योगवशिष्ठ के रचनाकार वशिष्ठ ही हैं, इनमे श्रीराम ओर वशिष्ठ जी के बीच में वार्तालाप हुए हैं, प्रकृति ओर प्रकृति से सम्बंधित इंसान की चिंताए, एकाग्रचित मन कैसे किया जाए इन सब के बारे में
काफी बताया गया है, अग्निपुराण के लेखक वशिष्ट बताये गए हैं ओर इन्होने ही पुलस्त्य ऋषि के साथ मिलकर ही विष्णु पुराण की रचना की है।

सातवीं बात – वशिष्ठ ऋषि ने आठ वसुओं को श्राप दिया था जब प्रभास वसु ने उनकी गाय चुराने की योजना बनायीं थी, इस कहानी को हम ३३ कोटि देवी देवता में सुना चुके हैं ।
तो दोस्तों ये थी वे सात बातें जो ऋषि वशिष्ठ के बारे ने थी, उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आयी होंगी ।

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