Hindu Dharam

सप्तऋषि कौन हैं? उनके क्या नाम हैं ?

ऋग्वेद में लगभग एक हजार सूक्त हैं, लगभग दस हजार मन्त्र हैं। चारों वेदों में करीब बीस हजार हैं और इन मन्त्रों के रचयिता कवियों को हम ऋषि कहते हैं। ऋग्वेद के मन्त्रों की रचना में अनेकानेक ऋषियों का योगदान रहा है। पर इनमें भी सात ऋषि ऐसे हैं jinka yogdaan abhinn hai
Ye saat hain 1.वशिष्ठ, 2.विश्वामित्र, 3.कण्व, 4.भारद्वाज, 5.अत्रि, 6.वामदेव और 7.शौनक।

पुराणों में सप्त ऋषि के नाम पर भिन्न-भिन्न नामावली मिलती है। विष्णु पुराण अनुसार सप्तऋषि इस प्रकार है :-

वशिष्ठकाश्यपो यात्रिर्जमदग्निस्सगौत। विश्वामित्रभारद्वजौ सप्त सप्तर्षयोभवन्।।

अर्थात् सातवें मन्वन्तर में सप्तऋषि इस प्रकार हैं:- वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज। इसके अलावा पुराणों की अन्य नामावली इस प्रकार है:- ये क्रमशः केतु, पुलह, पुलस्त्य, अत्रि, अंगिरा, वशिष्ट तथा मारीचि है।

महाभारत में सप्तर्षियों की दो नामावलियां मिलती हैं। एक नामावली में कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ के नाम आते हैं तो दूसरी नामावली में पांच नाम बदल जाते हैं। कश्यप और वशिष्ठ वहीं रहते हैं पर बाकी के बदले मरीचि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु नाम आ जाते हैं। यहां प्रस्तुत है महाभारत के अनुसार सप्तऋषियों का परिचय: 

वशिष्ठ, विश्वामित्र, भारद्वाज, अत्रि, गौतम, जमदग्नि और कश्यप |

 

  1. वशिष्ठराजा दशरथ के कुलगुरु ऋषि वशिष्ठ को कौन नहीं जानता। ये दशरथ के चारों पुत्रों के गुरु थे। वशिष्ठ के कहने पर दशरथ ने अपने चारों पुत्रों को ऋषि विश्वामित्र के साथ आश्रम में राक्षसों का वध करने के लिए भेज दिया था। कामधेनु गाय के लिए वशिष्ठ और विश्वामित्र में युद्ध भी हुआ था।
  2. विश्वामित्रऋषि होने के पूर्व विश्वामित्र राजा थे और ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को हड़पने के लिए उन्होंने युद्ध किया था, लेकिन वे हार गए। इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया। विश्वामित्र की तपस्या और मेनका द्वारा उनकी तपस्या भंग करने की कथा जगत प्रसिद्ध है। विश्वामित्र ने अपनी तपस्या के बल पर त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेज दिया था। माना जाता है कि हरिद्वार में आज जहां शांतिकुंज हैं उसी स्थान पर विश्वामित्र ने घोर तपस्या करके इंद्र से रुष्ठ होकर एक अलग ही स्वर्ग लोक की रचना कर दी थी। विश्वामित्र ने इस देश को गायत्री मन्त्र दिया था |
  3. भारद्वाजवैदिक ऋषियों में भारद्वाज-ऋषि का उच्च स्थान है। भारद्वाज के पिता बृहस्पति और माता ममता थीं। भारद्वाज ऋषि राम के पूर्व हुए थे, लेकिन एक उल्लेख अनुसार उनकी लंबी आयु का पता चलता है कि वनवास के समय श्रीराम इनके आश्रम में गए थे, जो ऐतिहासिक दृष्टि से त्रेता-द्वापर का सन्धिकाल था। माना जाता है कि भरद्वाजों में से एक भारद्वाज विदथ ने दुष्यन्त पुत्र भरत का उत्तराधिकारी बन राजकाज करते हुए मन्त्र रचना जारी रखी।
    ॠग्वेद के छठे मण्डल के द्रष्टा भारद्वाज ऋषि हैं। इस मण्डल में भारद्वाज के 765 मन्त्र हैं। अथर्ववेद में भी भारद्वाज के 23 मन्त्र मिलते हैं। ‘भारद्वाज-स्मृति’ एवं ‘भारद्वाज-संहिता’ के रचनाकार भी ऋषि भारद्वाज ही थे। ऋषि भारद्वाज ने ‘यन्त्र-सर्वस्व’ नामक बृहद् ग्रन्थ की रचना की थी। इस ग्रन्थ का कुछ भाग स्वामी ब्रह्ममुनि ने ‘विमान-शास्त्र’ के नाम से प्रकाशित कराया है।
  4. अत्रिऋग्वेद के पंचम मण्डल के द्रष्टा महर्षि अत्रि ब्रह्मा के पुत्र, सोम के पिता और अनुसूया के पति थे। अत्रि जब बाहर गए थे तब त्रिदेव अनसूया के घर ब्राह्मण के भेष में भिक्षा मांगने लगे और अनुसूया से कहा कि जब आप अपने संपूर्ण वस्त्र उतार देंगी तभी हम भिक्षा स्वीकार करेंगे, तब अनुसूया ने अपने सतित्व के बल पर उक्त तीनों देवों को अबोध बालक बनाकर उन्हें भिक्षा दी। माता अनुसूया ने देवी सीता को पतिव्रत का उपदेश दिया था।
    अत्रि लोग ही सिन्धु पार करके पारस (आज का ईरान) चले गए थे, जहां उन्होंने यज्ञ का प्रचार किया। अत्रियों के कारण ही अग्निपूजकों के धर्म पारसी धर्म का सूत्रपात हुआ। अत्रि ऋषि का आश्रम चित्रकूट में था। मान्यता है कि अत्रि-दम्पति की तपस्या और त्रिदेवों की प्रसन्नता के फलस्वरूप विष्णु के अंश से महायोगी दत्तात्रेय, ब्रह्मा के अंश से चन्द्रमा तथा शंकर के अंश से महामुनि दुर्वासा पुत्र रूप में
  5. गौतम जिन्हें ‘अक्षपाद गौतम’ के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त है, ‘न्याय दर्शन’ के प्रथम प्रवक्ता माने जाते हैं। महाराज वृद्धाश्व की पुत्री अहिल्या इनकी पत्नी थी, जो महर्षि के शाप से पाषाण बन गयी थी। त्रेता युग में भगवान श्रीराम की चरण-रज से अहिल्या का शापमोचन हुआ, जिससे वह पाषाण से पुन: ऋषि पत्नी बनी। महर्षि गौतम बाण विद्या में अत्यन्त निपुण थे। जब वे अपनी बाणविद्या का प्रदर्शन करते और बाण चलाते तो देवी अहिल्या बाणों को उठाकर लाती थी। एक बार वे देर से लौटीं। ज्येष्ठ की धूप में उनके चरण तप्त हो गये थे। विश्राम के लिये वे वृक्ष की छाया में बैठ गयी थीं। महर्षि ने सूर्य देवता पर रोष किया। सूर्य ने ब्राह्मण के वेष में महर्षि को छात्ता और पादत्राण (जूता) निवेदित किया। उष्णता निवारक ये दोनों उपकरण उसी समय से प्रचलित हुए।
    गौतम ने गंगा की आराधना करके पाप से मुक्ति प्राप्त की थी। गौतम तथा मुनियों को गंगा ने पूर्ण पतित्र किया था, जिससे वह ‘गौतमी’ कहलायीं। गौतमी नदी के किनारे त्र्यंबकम् शिवलिंग की स्थापना की गई, क्योंकि इसी शर्त पर वह वहाँ ठहरने के लिए तैयार हुई थीं।
  6. जमदग्नि जिनकी गणना ‘सप्तऋषियों’ में होती है इनकी पत्नी राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका थीं. भृगुवंशीय जमदग्नि ने अपनी तप्सया एवं साधना द्वारा उच्च स्थान को प्राप्त किय अथा उनके समक्ष सभी आदर भाव रखते थे. पौराणिक कथाओं के अनुसार जब पृथ्वी पर हैहयवंशीय क्षत्रिय राजा kartvirya arjun/ sahastrarjun का आतंक एवं अत्याचार बढ़ जाता है
    तब सभी लोग इन राजाओं द्वारा त्रस्त हो जाते हैं. ब्राह्मण एवं साधु असुरक्षित हो जाते हैं धर्म कर्म के कामों में यह राजा लोग व्यवधान उत्पन्न करने लगते हैं. ऐसे समय में भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ को करते हैं जिससे प्रसन्न होकर भगवान वरदान स्वरूप उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान देते हैं और उनकी पत्नी रेणुका से उन्हें पाँच पुत्र प्राप्त होते हैं जिनके नाम थे रुक्मवान, सुखेण, वसु, विश्‍वानस और परशुराम. इन सभी में परशुराम जी उन हैहयवंशी राजाओं का अंत करते हैं
  7. कश्यप ऋषि प्राचीन वैदिक ॠषियों में प्रमुख ॠषि हैं जिनका उल्लेख एक बार ॠग्वेद में हुआ है। अन्य संहिताओं में भी यह नाम बहुप्रयुक्त है। इन्हें सर्वदा धार्मिक एंव रहस्यात्मक चरित्र वाला बतलाया गया है एंव अति प्राचीन कहा गया है। महाभारत एवं पुराणों में असुरों की उत्पत्ति एवं वंशावली के वर्णन में कहा गया है की ब्रह्मा के सात मानस पुत्रों में से एक ‘मरीचि’ थे जिन्होंने अपनी इच्छा से कश्यप नामक प्रजापति पुत्र उत्पन्न किया। कश्यप ने दक्ष प्रजापति की 17 पुत्रियों से विवाह किया। दक्ष की इन पुत्रियों से जो सन्तान उत्पन्न हुई अदिति से आदित्य (देवता) aur दिति से दैत्य |भागवत पुराण, मार्कण्डेय पुराण के अनुसार भी कश्यप की बारह भार्याएँ थीं। एक परम्परा के अनुसार सभी जीवधारियों की उत्पत्ति कश्यप से हुई।

Who are Saptrishi? What are their Names?

In Rigveda there are around 1000 sukhta and 10000 hymns. All 4 Vedas consists around 20 thousand hymns. There so many Rishi’s who have given their contribution in there Hymns but most important 7 Rishi are:

1) Vashishtha
2) Vishvamitra
3) Kanya
4) Bhardwaj
5) Attri
6) Vamdev
7) Shonak

There are different names available in purans. According to vishnu Puran the names of 7 sapta rishi is given by saying a Mantra i.e. (Vashishtha Kashyapo ya Attri jandagne Saugata vishvamitra bhardwajo sapta sapta rishio bhawana.)

There are two names available in Mahabharata. Vashishtha, Kashyap, Attri, Jamdagni, Gautam, Vishvamitra, Bhardwaj are available in one section and Kashyap, Vashishtha, Marichi, Angiras, Pulah, Pulast, Kratu are available in another section. Here we will discuss names of the Rishi according to Mahabharata.

1) Vashistha: Guru of Raja Dashratha kul Vashishtha. He was Guru of all 4 sons of Raja Dashratha. These sons of Dashrath went to kill demons with Vashishtha. Vishvamitra and Vashishtha fought for kamdhenu cow. In our previous video we have discussed about Vashishtha.

2) Vishvamitra. He was king before. He fought for kamdhenu cow with rishi Vishvamitra in order to own that cow but he lost. After that he started tapasya. Story menka spoiling tapasya of Vishvamitra is world famous. He sent trishanku to heaven with the help of his Tapasya. In haridwar at shantikunj he did tapasya and created his own heaven. Gayatri Mantra isgiven by Vishvamitra.

3) Bhardwaj. He has a top rank in all vedic Gurus. Brahspati was his father and Mamta was his mother. At the time of Vanvaas Lord Ram visited his ashram. He has also written Mantras. Writer of Rigveda’s 6th Mandal is Bhardwaj. In this Mandal there are 765 Mandals. He has also written Mantras is Atharva veda. He is also a founder of Bhardwaj samhiti and Bhardwaj sanhita. Yantra sarvastra was also founded by Bhardwaj.

4) Attri. He was son of Brahmaputra, father of som and husband of devi ansuiya. He was writer of Rigveda’s 5th Mandal. When Attri was not home, then Tridev asked Bhiksha from ansuiya. They asked ansuiya to remove all the clothes then Mata ansuiya made them infant and gave Bhiksha. She gave Site clothes that never gets dirty. Parsi relegion was also founded by Attri.

5) Gautam. He is also known as akshapaat Gautam. He got married to Ahilya. By curse of mehrishi, devi Ahilya got pashaan. Lord Ram set her free drom that cursein treta yug. Gautam was trainedin baan vidya. Surya dev gave umbrella and shoes to Ahilya. Gautam washed his sins by taking bath in Ganga. Ganga river is also known as Gautami. Triyambak shivlinga is situated near gautami river.

6) Jamdagni. He got married to Renuka. He achieved so many thing by his tapasya. According to puranic katha, when shaistrarkiya arjun was disturbing people then Jamdagni did utreshti yagya. God gave him Vardaan and he got 5 childrenfrom Renuka.

7) Kashyap. He is also mentioned in Rigveda. In Mahabharata and puraans, Origin of asur and devta is connected with Kashyap rishi. He got with 17 ladies Aditi and Diti was two of them. According to bhagwat puraan and markande puraan there are 12 bharyay or kashyap.

So guys these were 7 great Rishi.

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